कितना करूं इंतजार: क्या उसका इंतजार आखिर खत्म हुआ?

बारिश की रात में आदित्य और सिया की भावुक प्रेम कहानी, लंबे इंतजार के बाद दोबारा मुलाकात का दृश्य
Emotional Relationship Story: सिया ने मोबाइल की स्क्रीन पर समय देखा। रात के दस बज चुके थे। पूरे दिन में यह सातवीं बार था जब उसने आदित्य का नंबर मिलाया, लेकिन हर बार वही जवाब मिला—"जिस नंबर पर आप कॉल कर रहे हैं, वह फिलहाल उपलब्ध नहीं है।" उसने गहरी सांस ली, फोन को मेज पर रखा और खिड़की के बाहर देखने लगी। बारिश की हल्की बूंदें शीशे से टकरा रही थीं, लेकिन उसके मन में उठ रहा तूफान उन बूंदों से कहीं ज्यादा तेज था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर आदित्य अचानक बिना कुछ बताए कहां गायब हो गया।

करीब चार साल पहले दोनों की मुलाकात एक निजी कंपनी में हुई थी। शुरुआत में सिर्फ काम की बातें होती थीं, फिर दोस्ती हुई और धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के सबसे करीब आ गए। आदित्य शांत स्वभाव का था, जबकि सिया हर बात खुलकर कहने वाली लड़की थी। दोनों का रिश्ता इतना मजबूत हो चुका था कि ऑफिस में लगभग हर कोई उनके बारे में जानता था। दोनों ने अपने-अपने परिवारों को भी इस रिश्ते के बारे में बता दिया था। शुरुआत में थोड़ा विरोध हुआ, लेकिन समय के साथ दोनों परिवार भी मान गए। शादी की तारीख तय करने की बातें शुरू हो चुकी थीं। ऐसा लग रहा था कि अब उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी बस कुछ ही कदम दूर है।

लेकिन किस्मत ने अचानक ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक दिन आदित्य के पिता को गंभीर हार्ट अटैक आया। घर की सारी जिम्मेदारी एक पल में आदित्य के कंधों पर आ गई। इलाज के लिए लाखों रुपये की जरूरत थी। उसने अपनी जमा पूंजी खर्च कर दी, दोस्तों से उधार लिया और बैंक से लोन भी लिया। इसी बीच कंपनी में भी कर्मचारियों की छंटनी हुई और आदित्य की नौकरी चली गई। कुछ ही महीनों में उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी थी।

उधर सिया को लगने लगा कि आदित्य उससे दूर होता जा रहा है। पहले जहां वह दिन में कई बार फोन करता था, अब कई-कई दिन तक कोई बात नहीं होती थी। जब भी सिया मिलने की बात करती, आदित्य कोई न कोई बहाना बना देता। सिया को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्या बदल गया है। उसने कई बार पूछा भी, लेकिन आदित्य हर बार यही कहता, "बस थोड़ा वक्त और दे दो, सब ठीक हो जाएगा।"

समय बीतता गया। एक दिन आदित्य का फोन पूरी तरह बंद हो गया। उसका सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद था। ऑफिस छोड़ चुका था और पुराने किराए के मकान से भी जा चुका था। सिया ने उसके दोस्तों से पूछा, रिश्तेदारों से बात की, लेकिन किसी के पास कोई जवाब नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे आदित्य बिना कोई निशान छोड़े कहीं गायब हो गया हो।

घर वाले सिया पर शादी का दबाव बनाने लगे। कई रिश्ते आए, लेकिन हर बार उसने मना कर दिया। लोग उसे समझाते कि जिसने बिना बताए छोड़ दिया, उसका इंतजार करना बेकार है। लेकिन सिया के दिल में कहीं न कहीं यह भरोसा था कि आदित्य उसे धोखा देकर नहीं जा सकता। जरूर कोई ऐसी मजबूरी होगी जो वह किसी को बता नहीं पाया।

दो साल बीत गए। जिंदगी धीरे-धीरे अपनी रफ्तार से चलती रही। सिया ने नौकरी बदल ली और खुद को काम में व्यस्त रखने की कोशिश की, लेकिन हर जन्मदिन, हर त्योहार और हर खास दिन उसे आदित्य की याद दिला देता। उसने कभी उसका नंबर मोबाइल से डिलीट नहीं किया। कभी-कभी वह यूं ही कॉल लगा देती, यह जानते हुए भी कि दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आएगा।

एक शाम ऑफिस से लौटते वक्त उसकी नजर सड़क किनारे बने एक छोटे से चाय के स्टॉल पर पड़ी। वहां एक आदमी ग्राहकों को चाय दे रहा था। चेहरे पर दाढ़ी थी, कपड़े साधारण थे, लेकिन आंखें बिल्कुल वैसी ही थीं। सिया कुछ पल के लिए वहीं रुक गई। उसने दोबारा गौर से देखा। वह आदित्य ही था।

आदित्य ने भी उसे देख लिया। दोनों की नजरें मिलीं, लेकिन कोई कुछ नहीं बोला। कुछ देर बाद आदित्य धीरे-धीरे उसके पास आया। उसकी आंखों में शर्म, थकान और पछतावा साफ दिखाई दे रहा था।

उसने धीमी आवाज में कहा, "मैं तुम्हें अपनी मुश्किलों का बोझ नहीं बनाना चाहता था। जब नौकरी गई, पापा बीमार पड़े और कर्ज बढ़ गया, तब लगा कि मैं तुम्हें खुशियां नहीं दे पाऊंगा। इसलिए दूर चला गया। सोचा था जब सब ठीक हो जाएगा, तब लौटकर तुम्हारे सामने आऊंगा। लेकिन वक्त निकलता गया और हिम्मत खत्म होती गई।"

सिया की आंखों में आंसू थे। उसने सिर्फ एक सवाल पूछा, "क्या तुम्हें कभी यह लगा कि फैसला मेरा भी होना चाहिए था? अगर मुश्किलें तुम्हारी थीं, तो क्या मैं तुम्हारे साथ खड़ी नहीं हो सकती थी?"

आदित्य के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। वह बस सिर झुकाकर खड़ा रहा।

उस दिन दोनों कई घंटों तक बातें करते रहे। पहली बार आदित्य ने अपने मन का हर डर, हर परेशानी और हर मजबूरी सिया के सामने रख दी। सिया ने भी साफ कह दिया कि रिश्ते भरोसे से चलते हैं, खामोशी से नहीं। अगर वह पहले ही सच बता देता, तो शायद दोनों मिलकर हर मुश्किल का सामना कर लेते।

अगले कुछ महीनों में आदित्य ने फिर से नौकरी शुरू की। धीरे-धीरे उसका कर्ज भी कम होने लगा। इस बार उसने कोई बात सिया से नहीं छिपाई। दोनों परिवार फिर से मिले। जो लोग पहले इस रिश्ते के खिलाफ थे, उन्होंने भी महसूस किया कि मुश्किल समय में साथ निभाने वाले लोग ही असली जीवनसाथी बनते हैं।

करीब छह महीने बाद एक छोटे से समारोह में आदित्य और सिया की शादी हो गई। शादी के बाद जब किसी ने सिया से पूछा, "इतना लंबा इंतजार करने का कभी अफसोस नहीं हुआ?"

सिया मुस्कुराई और बोली,

"अगर भरोसा सच्चा हो, तो इंतजार लंबा जरूर लगता है, लेकिन बेकार नहीं जाता।"

उसकी बात सुनकर आदित्य ने उसका हाथ थाम लिया। दोनों की आंखों में एक सुकून था, जो शायद सिर्फ वही लोग समझ सकते हैं जिन्होंने किसी अपने का लंबे समय तक इंतजार किया हो।

उस दिन आखिरकार उस सवाल का जवाब मिल गया, जो सिया कई सालों से खुद से पूछ रही थी—हाँ, उसका इंतजार आखिर खत्म हो गया था।

Next Post Previous Post
No Comment
Add Comment
comment url